आपको फ़ौज में सब से अजीब आर्डर क्या मिला ?

, पूर्व-सैनिक

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ट्रेनिंग के दौरान सोने से पहले रेगुलर चेकिंग होती थी

बिलकुल 12 बजे रात को हम सब अपने अपने बिस्तर  के किनारे खड़े हो जाते, हमारे जूते ठीक, जमीन बेदाग़ और लॉकर बिलकुल साफ़ ...

हमारा कमांडर हर रात आता और कहता "और मेरे प्यारे चूज़ों..कैसे हो?" और एक एक कर के हर एक को देखता की बिसतर सही से लगाया है और अपने सारे काम किये हैं की नहीं.. जब ये सब ख़तम हो जाता तो वो लाइट बंद कर देता और हम सब 4 घंटे की नींद में चले जाते ...

एक रात, बस आधी रात से पहले मेरी टीम और मैं सब अपने बिसतर के किनारे खड़े थे ...हमारा कमांडर बिलकुल 12 बजे आया और अपने रोज़ के मामूल की तरह बोले "और मेरे प्यारे चूज़ों..कैसे हो?

चेकिंग करते करते वो मेरे दोस्त के बिसतर  पर आकर रुक गया...

"तरुण! ये क्या हाल कर रखा है ?"

"श्रीमान समझ नहीं आया आप क्या कह रहे हैं "

"तरुण, यहाँ आओ, इसे देखो, क्या सच में तुम्हें कुछ ग़लत नहीं लग रहा ?"

"....ससस...सर मुझे सच में कुछ ग़लत नहीं लग रहा ..."

"ठीक है इसका मतलब तुम सब अंधे हो गए हो...सब लोग अपनी अपनी घडी निकालो"

ये सुन कर हमारे तो होश ही उड़ गए ...हमें लगा अब वो हमें कहेंगे की चार मिनट में तैयार हो के रात भर ग्राउंड के चक्कर लगाओ ...

“...तो अब ...तुम सब  चिमगादड़  बनोगे ...तुम लोगों के पास 30 सेकंड है . जल्दी !”.

हमें समझ नहीं आया वो क्या चाह रहे थे .

“ठीक है ... या तो तुम लोग मेरे आर्डर की न फ़रमानी कर रहे हो या तुम लोगों को पता नहीं है की चमगादड़ कैसे बनते है ”

हमें सच में नहीं पता था .

“तरुण ! आगे आओ...  तुम अपने  पैर  ऊपर  बैड से  लटकाओ जैसे चमगादड़  लटकाएगा और लटक जाओ ...

तरुण ने ऐसा ही किआ.

“तुम लोग किस चीज़ का इंतज़ार कर रहे हो ?

अगले 40 सेकंड में पूरी टीम चमगादड़ की तरह बैड से लटक रही थी...

“बहुत बढ़िया... तो अब तुम लोगों को पता है की चमगादड़ क्या होता है तो चलो अब उसकी तरह पंख हिलाओ...”

और हाँ....मेरी पूरी टीम बिस्तर से लटके  हाथ  चमगादड़ की तरह फडफड़ा रही थी

“बहुत बढ़िया... लेकिन एक चीज़ की कमी है ..... पता है क्या ... चमगादड़ अँधेरे में रहती है ”

** लाइट बंद कर दी जाती है **

“शुभ रात्रि टीम ”

“शुभ रात्रि  कमांडर सर ”

** दरवाज़ा बंद हो जाता है **

** पूरी टीम पागलों की तरह हंस रही थी  **

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