आर्ट में अब तक का सबसे साहसिक काम क्या था ?

, स्टूडेंट, BA

जवाब 1 year पहले लिखा गया • आपको इस में दिलचस्पी हो सकती है

रिदम जीरो 

-------हिदायत

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टेबल पर 72 चीज़ें रखी है और जो कोई चाहे उनमे से कोई भी चीज़ मुझ पर इस्तेमाल कर सकता है

परफॉरमेंस का नाम : मैं एक सामन हूँ 

इस दौरान मैं पूरी ज़िम्मेदारी लेती हूँ 

समय : 6 घंटे (8 बजे से 2 बजे तक)


आर्टिस्ट Marina Abramović ने एक दिन एक आर्ट शो किया जिसमे वो 6 घंटे तक खड़ी रहीं और उनके सामने रखे टेबल पर 72 चीज़ें थी. लोगों को उन सभी चीज़ों को जैसे चाहे वैसे इस्तेमाल करने की इजाज़त थी और इस पूरे शो के दौरान वो कोई भी प्रतिक्रिया नहीं देंगी और न ही हिलेंगी.

टेबल पर रखी 72 चीज़ों में एक बन्दूक, एक गोली थी, इसके इलावा कील, कैची, मेकअप , पानी , शराब, खुशबू और दूसरी चीज़ें भी थी...

आर्ट के जाने माने समीक्षक Thomas McEvilley ने इसे कुछ यूँ बयां किया  है :

शुरुआत बस हलकी फुलकी  हुई . किसी ने उसे गोल घुमा दिया, किसी ने उसके हाथ हवा में उछाल दिए..किसी ने उसे गन्दी तरह से छुआ . रात हुई तो मामला गरमाने लगा. तीसरे घंटे में उसके सारे कपडे शरीर से कट चुके थे..चौथे घंटे में वही ब्लेड उसकी खाल पर चलने लगे ... और खून बहने लगा ...  कोई उसका खून पीना चाहता था तो उसका गाला काट दिया. छोटे मोटे यौन उत्पीड़न भी हुए .. लेकिन वो इतनी दृढ़ निश्चय से खड़ी  थी की अगर उसका रेप भी हो जाता तो वो विरोध नहीं करती . इंसानी फितरत और मनोविज्ञान के हिसाब से  ये सब देख के अंतरात्मा की आवाज़ को सुनते हुए, देखने वालों में से ही एक "सुरक्षा दाल" भी बन गया. टेबल पर से लोड की हुई बन्दूक Marina के सर पर तान दी गयी और उसी की ऊँगली से उसका ट्रिगर दबवाया ही जाने वाला था की देखने वालो में एक झगडा छिड़ गया .

बेचारी.

तो जब उसके कपडे उतर गए .. बुरी तरह से छुआ ...चाकुओं से काटा, उसका खून पिया और हर तरह से उसको ज़लील किआ, फिर उसके ही हाथों में बन्दूक दे कर उसी के सर पर तान देने के बाद जब उसी की उँगलियों से गोली चलने वाली थी तब जा कर भीड़ में से कोई उसे बचाने आया (काम से काम कुछ तो अच्छे लोग हैं)

फिर 6 घंटे बाद जब वो चलने फिरने लगी, तो  एक असली इंसान के तौर पर उसका सामना करने में असमर्थ भीड़ भाग गयी .


ये आर्ट का एक बेहतरीन नमूना था जिससे हमारे बारे, इंसानियत के बारे में, बहुत कुछ पता लगता है, की हम अपने अंदर अपने व्यक्तित्व का एक हिस्सा दबाये रखते हैं. ऐसा लगता है की अगर परिणाम की चिंता हटा दी जाये तो हम में से ज़्यादातर लोग ये भूल जायेंगे की उनका वयवहार कैसा होना चाहिए. जब हम दुसरे को अपनी तरह का इंसान न समझें तो इंसानियत को भुला देना कितना आसान है.

मैं अक्सर सोचता हूँ की अगर ये कोई मर्द करता तो क्या परिणाम होते. आप ये भी सोच सकते हैं ये लोग इतने खुनी कैसे हो सकते हैं.

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