क्या दोस्त ज़रूरी होते हैं ?

, उद्यमी

जवाब 1 year पहले लिखा गया • आपको इस में दिलचस्पी हो सकती है

इन से मिलिए, इनका नाम है न्यूटन, नाम तो सुना ही होगा!

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ये बड़े वाले....**तीये थे. 

और अकेला रहना इन्हें बड़ा पसंद था.

इनके पास न बीवी थी .. न गर्लफ्रेंड, कई दर्जन दुश्मन ज़रूर थे मगर कोई सामाजिक जीवन बिलकुल नहीं था

पूरी जिंदगी में सिर्फ एक दोस्त था

इन्हें कॉलेज में एक बाँदा मिला जिसका नाम था विकिन्स

इनकी दोस्ती की शुरुआत तब हुई जब एक दिन ये चलते चलते एक दुसरे से टकराए. बातों बातों में मालूम हुआ के दोनों एक ही दिक्क़त का शिकार हैं:  दोनों अपने रूम पार्टनर्स से परेशान हैं क्यों के दोनों के रूम पार्टनर बहुत ज्यादा बोलते हैं . सो इन्होने सोचा हम दोनों एक साथ रह लेते है. और शिफ्ट हो गए एक ही कमरे में

फिर कुछ साल एक साथ पढ़े और न्यूटन की अजीब अजीब हरकतों के बावजूद भी विकिन्स उसके साथ टिका रहा .. उसका ख्याल रखता .. और हमेशा ध्यान रखता के सही से खाना पीना और सोना हो रहा है की नहीं

इनकी बातें हमेशा पढाई लिखाई से जुडी होती - इन दोनों की यही एक मात्र रूचि थी. हमेशा विकिन्स ने न्यूटन को अजीब अजीब हालात से बचाया

लेकिन ये भी नहीं चला .


ऐसा माना जाता है की न्यूटन और विकिन्स की काफी तगड़ी लडाई हुई

ये बात ढकी छुपी नहीं है की न्यूटन सख्त दिल का,गुस्से वाला, रूखा और बदतमीज़ आदमी था और उसके पास लोगों के लिए टाइम नहीं होता था .. जब तक उसे उन की ज़रुरत नहीं पड़ती थी

विकिन्स ने न्यूटन की ज़िन्दगी से निकलने के बाद उसके बारे में बात करना बंद कर दिया. अजीब बात है न ? क्यों के लोग तो खुद को बड़े लोगों से जोड़ते हैं मगर नहीं.

विकिन्स ने अपने बेटे तक को ये नहीं बताया की वो न्यूटन को जानता है


विकिन्स के जाने के बाद न्यूटन को ये एहसास हुआ की विकिन्स ने उसके लिए कितना कुछ किया था

लेकिन, उसने नया असिस्टेंट रख लिया

और दोस्ती ख़त्म

एक अकेली दोस्ती भी ख़त्म.


कुछ लोग दोस्ती के लिए बने ही नहीं होते .

वो दूसरो को नहीं झेल पाते और दुसरे उन्हें नहीं झेल पाते

वे खुद को एक कमरे में बंद कर के काम पर लग जाते हैं और कुछ करते रहते हैं

यही सब के लिए अच्छा होता है.


न्यूटन का जीवन कोई आसन या मजेदार नहीं था. उसका जीवन नुकसान, परेशानी और मेहनत से भरा पड़ा था और ज़िन्दगी में खुशिया बहुत कम थी

लेकिन वो आगे चल कर बड़ा मशहूर हुआ

जब लोग बहस करते हैं की "आज में जियें" या "मेहनत करें - हमेशा के लिए छाप छोड़ जाये" तब हमें अपने बारे में सोचना चाहिए

हमें कैसा जीवन चाहिए ?

हमें दोस्तों की "जरूरत" नहीं होती

हवा या पानी की तरह वो ज़रूरी नहीं हैं ... लेकिन हर चीज़ की तरह उनके अपने फायदे और नुकसान है.

आप अपनी ज़िन्दगी चुनिए की आपको कैसी ज़िन्दगी चाहिए. 

मैंने अपनी तो चुन ली है.

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