तार्किक विरोधाभास क्या होता है?

, छात्र @ इकोनॉमिक्स

जवाब 1 year पहले लिखा गया • आपको इस में दिलचस्पी हो सकती है

अमीर मेहमान का विरोधाभास

मैंने ये कहीं पढ़ा था, याद नहीं कहाँ...:

एक गांव था जहाँ सभी लोग भरी क़र्ज़ में थे और पूरा गांव ग़रीब था  ... किसी के पास भी क़र्ज़ चुकाने का पैसा नहीं था

उस गांव में एक होटल था जिसमे अब लोग नहीं आते थे और ये होटल जल्द ही बंद होने वाला था

एक दिन उस होटल में एक अमीर मेहमान आया, लेकिन बुकिंग कन्फर्म करने से पहले वो एक रात होटल में गुज़ार कर देखना चाहता था, मालिक परेशान तो थे ही, वे फ़ौरन मान गए.

होटल के रिसेप्शनिस्ट ने मेहमान से थोड़े पैसे (सिक्योरिटी) माँगा और कहा की अगर होटल पसंद न आये वो उसे वापस ले सकते हैं. मेहमान मान गए

पता चला की जितना पैसा मेहमान ने जमा कराया था बिलकुल उतना ही खानसामे की  बकाया सैलरी थी. होटल के मालिक ने वो पैसे खानसामा को दे दिए

खानसामा ने देखा की जो उसे सैलरी मिली है उतने ही पैसे उसके दूकानदार पर उधार थे, तो वो पैसे दूकानदार को दे आया

दूकानदार ने देखा की इतने ही पैसे बीवी के इलाज के लिए डॉक्टर के उस पर उधार हैं, तो वो डॉक्टर का उधार चुका कर आ गया

डॉक्टर ने अपनी नर्स की दो महीने की बकाया सैलरी देदी.

नर्स टाउन में नयी थी और उसी होटल में रह रही थी मगर उसने पैसे नहीं दिए थे, उसने जा कर होटल में पूरे पैसे दे दिए

होटल के पास उतने ही पैसे वापस आ चुके थे जो उसने खानसामे को दिया था, होटल देखने के बाद अगली सुबह उस मेहमान को होटल पसंद नहीं आया और वो अपने पैसे ले कर वापस चला गया.

लेकिन हर किसी का क़र्ज़ अदा हो चुका था, और पहले और अब में कुछ बदला भी नहीं था .

किसी ने कुछ नहीं कमाया मगर अब हर कोई खुश था!

सवाल ये है के क्या  क़र्ज़  कोई चीज़ थी ?

इस  विरोधाभास के बारे में आप सोचें तो आपके होश उड़ jayegnge !

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