मर्द होने की क्या परेशानियां है?

, सचेत नागरिक, इंजीनियर, श्रमजीवी

जवाब 1 year पहले लिखा गया • आपको इस में दिलचस्पी हो सकती है

ये क़िस्सा बम्बई  की एक बस का है .

तन बदन की तोड़ देने वाली 36 घंटे की जॉब शिफ्ट करके मैं घर आ रहा था. 

बुरी तरह से थका हुआ, बदबूदार और नींद की कमी .. आप मेरी हालत समझ सकते हैं अगर ये सोचें की मैं पिछले 36 घंटों में सोया भी नहीं था 

बस में बहुत ज़्यादा भीड़ थी 

मैं सर के  ऊपर के डंडे तो पकडे खड़ा था और वहीँ एक नौजवान लड़की बैठी थी. थकान और बस के हिलने डुलने से मुझे चक्कर से आने लगे थे 

मैंने उस लड़की की तरफ देखते हुए बड़ी इज़्ज़त से बोलै "मैडम, मेरी तबियत ख़राब हो रही है, क्या मैं यहाँ बैठ जाऊ?"

*सब की नज़रें मुझपे आ गयी, नफरत भरी निगाहों से *

वो बोली "ये लेडीज सीट है , पीछे जाओ और किसी और से सीट मांगो"

मैं: "शुक्रिया जी"

*बात करते हैं औरत-मर्द की बराबरी की*

मर्द होने की यही परेशानी है

वैसे:

पीछे की सीट पर एक बूढी अम्मा ने मुझे सीट दे दी . 

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