ज़िन्दगी में सबसे ज़्यादा काम का सुझाव ?

, IITian 2010 Batch

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फेसबुक पर IIT खरगपुर  से  1977 बैच  के  एक पूर्व छात्र ने नौजवानो के लिए अपनी आपबीती  लिखी थी , जो  पढ़ने  लायक है :

"मैं एक केमिकल इंजीनियर हूँ और  एक मशहूर इंटरनेशनल कंपनी में काम किया करता था. तनखाह अच्छी थी, और ऐशो-आराम की ज़िन्दगी बिताने के लिए काफी पैसे थे. 

मेरे माता पिता बहुत मॉडर्न ख़यालात के नहीं थे मगर फिर भी उन्होंने मुझे किसी ऐसी लड़की से शादी करने से मना किया जिसने साइंस न पढ़ी हो. उसने प्रेसीडेंसी कॉलेज से आर्ट्स की पढ़ाई की थी लेकिन फिर भी मैंने अपने माँ बाप को मना लिया. मेरी खुशियों के तो ठिकाने ही नहीं रहे: एक बेहतरीन नौकरी, एक खूबसूरत बीवी जिससे मैं प्यार करता था, और राज़ी माँ बाप - किसी को और क्या चाहिए.

लेकिन जब हम  मुंबई में आये तो अचानक वो बदल गयी. अब वो हर बात में पहले से ज़्यादा अधिकार ज़माने लगी, छोटी-छोटी बातों का बतंगड़ बनाने लगी और तो और हर बात में राइ का पहाड़ बना देती. फ़ोन कॉल बहुत महंगे थे और वो एक घंटे से कम तो बात ही नहीं करती. मैं उससे थक चुका था. अब मैं भी उसकी बातों से खिजला जाता और फ़ोन कॉल लड़ाई झगडे की क्लास बनने लग गयी थी. इस सब के दरम्यान मुझे एक दूसरी लड़की में एक दोस्त दिखाई देने लगी, वो मेरी असिस्टेंट थी. घर की लड़ाईयां बढ़ती रही और साथ में इस नयी दोस्त के साथ इश्क़ भी.

ये दुर्गा पूजा की बात है मेरी मंगेतर मुझ पर घर आने का दबाव बना रही थी और तभी मैं उस पर फूट पड़ा . मैंने उससे वो बातें कही जिसका मुझे आज भी अफ़सोस है . और यहीं सब कुछ ख़त्म हो गया . 

और आज...., आज मुझे एहसास होता है की क्यों वो मुझ पर इतना अधिकार जमाती थी और मुझे एहसास होता है की फ़ोन कॉल में कुछ रूपए ज़्यादा भी लग जाते तो किसी का दिल तो न दुखता, आज मुझे एहसास होता है की वो ऑफिस की दोस्त तो पैसे की भूकी औरत थी(शादी से एक साल बाद उसने अपने पति से लाखों का गुजारा भत्ता वसूला), और मुझे एहसास होता है के अधिकार ज़माने से कभी कभी कोई नुकसान नहीं होता. आज मुझे एहसास है की खूबसूरत आँखों वाली वो लड़की एक ताज़ा हीरा थी जिसका एक ही चेहरा था और मैं उसे टूटा शीशा समझ रहा था . 

आज मेरी उम्र 63 साल है और मैं एक पॉश अपार्टमेंट में अकेला रहता हूँ. मुझे डॉक्टर ने अल्झाइमर का मरीज़ बताया है, मुझे ये लिखने में एक घंटे लग गए. आज मैं सोचता हूँ के काश मेरी वो हीरा मेरे साथ होती, लेकिन ग़लती तो उसकी थी ही नहीं. पिछली बार जब उसकी खबर लगी थी तो पता चला था की वो किसी आइवी लीग कॉलेज में टीचर है 

मैं आप सब नौजवान लोगों से यही कहूंगा की जल्दी में कोई फैसला मत लीजिये, थोड़ी देर की परीक्षाओं और लालचों के बहलावे में न आये और ऐसे इंसान की कम मत समझिये जो आप ही का भला चाहता है, आप उसको मत नजरअंदाज कीजिये जो  आप को खोने से डरता है , सितारों को गिनते गिनते चाँद को मत खो दीजिये क्यों के हो सकता है के कुछ रातों में चाँद न दिखे मगर सितारे आप के घर को रौशन तो नहीं कर सकते.

अब मेरी एक ही तमन्ना है: और वो ये की काश मेरी आखरी सांस उसकी याद मिटने से पहले चली जाये"

आपका प्यारा: एक बेवक़ूफ़"

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