सवाल

आपके जीवन का स्वर्ण-सिद्धांत क्या है ?

किरात सदस्यों द्वारा लिखे गये जवाब

धर्म और आध्यात्मिकता
, पंजाबी

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जब मनुष्य पहले पहल अस्तित्व में आये तो उनकी टेबल पर नाश्ता उनका इंतज़ार नहीं कर रहा होता था, जैसा की अब आपका करता है ..

उन्हें या तो जानवरों का शिकार करना पड़ता था या फिर किसी खाने लायक पौधे को ढूँढना पड़ता था ... जिंदगी की इस रेस में  कुछ बचे...और बाक़ी ख़त्म  ...

तस्वीर : गूगल इमेज .

वो अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे थे ... और वो उसमे सफल हुए

मैं चाहती हूँ के आप भी आज एक बात का एहसास करें.

आप एक ऐसी प्रजाति से हैं जिसने बेमानी चीजों से ज़िन्दगी बसर की है ... जब उनके पास कुछ भी नहीं था .. सिवाए इस ज्ञान के, की अपने जीवन के लिए ... ..जो भी करना पड़े ...चाहे जो भी हो जाये.. करना है  

आप एक ऐसी प्रजाति से हैं जो किसी भी हद तक जा सकती थी क्यों के उन्हें ये बताने वाला कोई नहीं था की वो क्या नहीं कर सकते और क्या कर सकते हैं

जब हालत मवाफ़िक़ न हो और दाव पर आपका जीवन हो तो आप वो बन जाते हैं जिसे आप खुद भी पहचान भी नहीं पाएंगे : एक दरिंदा जिसे किसी सीमा या कानून की परवा नहीं होती

मायूसी की हालत में आप एक ऐसी आग लगा सकते हैं जो दुनिआ की हर एक चीज़ को राख कर दे

आपके भीतर एक अनंत ताक़त और क्षमता है जिसे आप भी नहीं जानते 

कोई इसके परे आपको कुछ बताने का अधिकार नहीं रखता.

न आपका दोस्त, न आपका टीचर, न आपका पडोसी, न आपके मा बाप

न आप खुद .

आपकी कोई सीमा नहीं, और बस बात इतनी ही है . 

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