सवाल

पंजाब नेशनल बैंक से ग्यारह हज़ार करोड़ रूपए का फ्रॉड कैसे किआ गया ?

किरात सदस्यों द्वारा लिखे गये जवाब

व्यापार और उद्यमिता
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जवाब 2 years पहले लिखा गया • आपको इस में दिलचस्पी हो सकती है

एक ऐसा फ्रॉड जिसमे  110000000000 रूपए चले गए!

जी हाँ आपने सही पढ़ा.. एक बार फिर से '०' गिन लीजिये ..

आइये समझते हैं के ये हुआ कैसे ...

 

फ्रॉड :  

पंजाब नेशनल बैंक ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज को एक लेटर(प्रेस रिलीज़) दिया :

जिसमे  लिखा था की

बैंक को कुछ फ्रॉड लेनदेन का पता चला है जो मुंबई के एक ब्रांच में हुआ है जिस कारण कुछ खाताधारकों को फायदा हुआ है ... इस लेनदेन की वजह से दुसरे बैंको ने अपने विदेशी कस्टमर को पैसा दिया है ...फ़िलहाल हमारे बैंक में ये लेनदेन आकस्मिक हैं... और इसकी बैंक पर ज़िम्मेदारी कानून लेनदेन के असली या नक़ली होने के हिसाब से तय की जाएगी .. ये लगभग 1771.69 मिलियन अमरीकी डॉलर की हैं... मामला कानून के हवाले किया जा चुका है ताकि गुनहगारों को सजा मिल सके

बैंक साफ सुथरे और पारदर्शी बैंकिंग को लेकर  प्रतिबद्ध है

आइये इन चीज़ों को समझने से पहले कुछ शब्दों का मतलब जानते हैं :

  1. क्रेता क्रेडिट (Buyer’s क्रेडिट) 
    ये एक कम समय का उधार होता है जो कोई इम्पोर्टर, विदेशी बैंको से अपने देश में सामान मंगवाने के लिए लेता है इसको एक मिसाल से समझते हैं :

    मन लीजिये एक भारतीय कंपनी जिसका नाम है X Ltd एक अमरीकी कंपनी B Ltd से कोई सामान इम्पोर्ट करती है जिसकी कुल क़ीमत है 1 लाख डॉलर है.  X Ltd का अकाउंट  SBI(Mumbai) में है.  X Ltd चाहे तो वो खुद B Ltd. को इतने पैसे दे सकती है या क्रेता क्रेडिट (Buyer’s क्रेडिट) द्वारा भी पैसे दे सकती है. मान लीजिये X Ltd ने दूसरा तरीक़ा अपनाया ..(यानि फ़िलहाल के लिए किसी  विदेशी बैंक से बिल अदा  करने कहा ) तो उसे किसी क्रेता क्रेडिट प्रबन्ध करने वाले”(Buyer’s Credit Arranger) की ज़रुरत पड़ेगी ... 

    अब क्रेता क्रेडिट प्रबन्ध करने वाला किसी विदेशी बैंक से उस रक़म पर सूद की दर तय करेगा. मान लीजिये  Axis Bank जो New York में है ऐसी सूद की दर बताता है  SBI(Mumbai) को मंजूर है तो  Axis Bank(New York) पैसे  SBI(Mumbai) को ट्रांसफर करेगा  जहाँ से B Ltd को पेमेंट मिल जाएगी,  हमारी कंपनी X Ltd SBI(Mumbai) को सूद के साथ पैसे अदा कर देगी .. फिर SBI(Mumbai)  Axis Bank(New York) को पैसे भेज देगा ... और इस तरह लेनदेन पूरा हुआ ... 
    इस साडी प्रक्रिया में सब से अहम् एक लेटर है जिसे वचन-पत्र (Letter of Undertaking/Letter of Comfort) कहते हैं जो हमारा बैंक  SBI(Mumbai) जारी करता है 

  2. वचन-पत्र (Letter of Undertaking/Letter of कम्फर्ट):
    आसान भाषा में कहें तो ये  importer’s bank(हमारी मिसाल में SBI Mumbai ) द्वारा विदेशी बैंक को दिया गया एक आश्वासन होता है  की इम्पोर्टर उधार लिए गए पैसे चुकाने की स्तिथि में है
  3. SWIFT:
    स्विफ्ट एक शार्ट फॉर्म है  Society for Worldwide Interbank Financial टेलीकम्यूनिकेशन का . आसान शब्दों में ये एक पूरी दुनिआ के बैंको का एक नेटवर्क है जिससे एक बैंक दुसरे बैंक को लेनदेन जी जानकारी भेज सकते हैयूँ समझिये जैसे ये एक "मैसेज" करने का नेटवर्क है जिससे एक बैंक दुसरे बैंक को अपने बदले पेमेंट करने या लेनदेन करने को कह सकते हैं

    हमारी मिसाल में जैसे ही SBI(Mumbai) ने वचन पत्र दिए.. Axis Bank(New York) को एक SWIFT message मिलेगा की X Ltd को क्रेता क्रेडिट (Buyer’s क्रेडिट) दे दिया जाये 

अब आप सोच रहे होंगे की कोई इम्पोर्टर क्रेता क्रेडिट क्यों लेगा ? 

जवाब है कम सूद की दर... विदेशी बैंकों में सूद की दर कम होती है .. तो सस्ते उधार के लिए ऐसा किया जा सकता है


अब ये सब समझने के बाद आपको ये केस ठीक  से समझ में आएगा

PNB मुंबई ब्रांच के कुछ अधिकारीयों ने धोकाधड़ी कर के वचन-पत्र (Letter of Undertaking/Letter of कम्फर्ट) नीरव मोदी के नाम से जारी कर दिए जिससे PNB को ग्यारह हज़ार करोड़ की कीमत अदा करनी होगी

 

ये घोटाला शुरू कैसे हुआ ?

ये पूरा घोटाला  INR 280 Crore के फ्रॉड के खुलने के बाद सामने आया जिसमे ग़लत तरीके से वचन पत्र जारी किये गए थे.

हुआ क्या ?

कुछ पार्टनरशिप फर्म Diamond R USSolar Exports, और  Stellar Diamonds  January 16 को बैंक के पास आयी और इम्पोर्ट डॉक्यूमेंट दिखा कर बैंक से क्रेता क्रेडिट (Buyer’s क्रेडिट) माँगा ... मगर इन कंपनियों के पास कोई लिमिट नहीं थी इस लिए बैंक ने  100% cash मार्जिन मांगा जिसकी बेस पे उन्हें क्रेडिट चाहिए था . इस पर इन कंपनियों ने कहा की हम तो पहले भी ये फैसिलिटी लेते रहे हैं ... (जब की बैंक के पास ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं था)

जब छान बीन की गयी तो पता चला की बैंक के कुछ अधिकारीयों ने बैंक के रिकॉर्ड सिस्टम को अनदेखा करते हुए इन कंपनियों को वचन-पत्र जारी किये थे ... इन वचन-पत्रों को जारी करने से पहले किसी प्रकार की कार्येवहि नहीं की गयी थी .. और जैसा की पहले बताया की वचन-पत्र एक गारंटी होते है ...अगर किसी वजह से इम्पोर्टर पैसे नहीं दे पता तो ज़िम्मेदारी बैंक पर आती है ..

लेकिन बैंक के अधिकारयों ने SWIFT सिस्टम में विदशी बैंको से पैसे अदा करने को कहा था . जिन बैंको से पैसे अदा करने कहा गया था उसका नाम है हांगकांग का  Allahabad Bank (जिसे 5  वचन-पत्र जारी किये गए ) और हांगकांग का ही Axis Bank (जिसे 3 वचन-पत्र जारी किये गए).

चौकाने वाली बात ये है की जो पैसे लिए गए वो इम्पोर्ट के लिए इस्तेमाल नहीं हुए !

अब आप समझ गए होंगे की PNB ने बहुत सरे वचन पत्र जारी किये और उन्हें पूरा पैसा चुकाना होगा जो इन कंपनियों ने डकार लिए.


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